प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

04 September 2015

खुद को जलाते चलना...

राह के पत्थर हटाते चलना ,
पथ पर फूल बिछाते चलना ,
अंधेरे तो मिलेंगे ही मिलेंगे ,
पर तुम चिराग हो, खुद को जलाते चलना |

लक्ष्य पथ पर निडर हो चलना,
गिर न जाओ, सम्भल कर चलना,
समय के दुश्मन तो रोकेंगे ही रोकेंगे,
पर तुम कमान हो, खुद को तीर बनाते चलना |

आँधी में भी मगन हो चलना,
भवरों में भी सबल हो चलना,
सागर की लहरें तो डूबोयेंगी ही डूबोयेंगी,
पर तुम मांझी हो, खुद को पतवार बनाते चलना |

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