प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

04 August 2015

फ़ुर्सत मिलें तो देश चलना

फ़ुर्सत मिलें तो देश चलना |


देश तो अपने घुटने चल रहा है
अराजकता में हर रोज़ जल रहा है

प्राथमिक वादें अब हवा हो गये
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार
25 वर्ष के लिए अलविदा हो गये


आ जाये अगर याद "वो लहर क्यो थी?"

तो इस सत्ता काल में ही लाना
फ़ुर्सत मिलें तो देश चलना |


लोगो की आँखों के सपने छोटे थे
उनकी हक़ीकत ना समझी, जो मोटे थे

अत्याचार, लूट, महँगाई करने वालो
"जनता माफ़ नही करेगी"
ये देवो की धरती ना जाने क्यो चुपचाप सहेगी


आवाज़ दब जाये जब लाखों की
तब अपनी आवाज़ लगाना
फ़ुर्सत मिलें तो देश चलना |

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