प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

19 December 2011

जुबां अब बंद नहीं होती...

जुबां अब बंद नहीं होती 
क्यूँ रातें कम नहीं होती 
कहूँ क्या क्या तुम्हे अब मैं 
ये बातें कम नहीं होती 

बाँहें करती हैं बेईमानी 
नशा छा जाता रूहानी 
अदाएं कुछ तो कम कर दो 
मचल उठती है ज़वानी 

तुमें खुद को नहीं एह्सा 
ये तुझमें तेज है कैसा 
कमल की पंखुड़ी काया 
कि तन लगता है महका सा 

निगाहों में जादू है क्या 
बुझ गया दिल का दीया 
जीने को मैंने हर एक पल
ज़हर नज़रों का है पीया 

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