महफ़िलों में नहीं जा पता हूँ मैं आजकल
रुसवाइयों में अपनी ही खो जाता हूँ में आजकल |
वो नाम जो तुने कभी दिया था बड़े प्यार से
कोई और ले तो दिल बड़ा रुलाता है आजकल |
तेरी यादें मेरे जिस्म की परछाइयाँ है बन गयी
तेरा नाम ले दोस्त मुझे सताते है आजकल |
मर कर ही खत्म होगा अब ये सारा सिलसिला
पर दीवानों को मौत कहा आती है आजकल |
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