प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

05 August 2011

नाज़ुक से रिश्तें...

अटूट से ये लगने वाले, नाज़ुक से रिश्तें 
ग़मों की झोली में पलते, खुशियों के रिश्तें |

तू कहता वो है मेरा, वो है मेरा, वो है मेरा 
ज़रा पूछ के दो देख, क्या निभायेगा रिश्तें |

ले मान अपने मन की, भुला दे तू सब दिल से 
जाने कब हो जाएँ बंद, ये तो नाम के है रिश्तें |

ये छोड़ दे फ़िक्र, कोई प्यार तुझे देगा 
मरने के बाद आग देंगें, तुझको ही ये रिश्तें |

ना होगी फिर हरी, टूट सूख गयी जो डाली 
जन्मेगा बार बार वो, जो निभायेगा रिश्तें ||

No comments:

Post a Comment