अटूट से ये लगने वाले, नाज़ुक से रिश्तें
ग़मों की झोली में पलते, खुशियों के रिश्तें |
तू कहता वो है मेरा, वो है मेरा, वो है मेरा
ज़रा पूछ के दो देख, क्या निभायेगा रिश्तें |
ले मान अपने मन की, भुला दे तू सब दिल से
जाने कब हो जाएँ बंद, ये तो नाम के है रिश्तें |
ये छोड़ दे फ़िक्र, कोई प्यार तुझे देगा
मरने के बाद आग देंगें, तुझको ही ये रिश्तें |
ना होगी फिर हरी, टूट सूख गयी जो डाली
जन्मेगा बार बार वो, जो निभायेगा रिश्तें ||
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