कुछ खोया खोया रहता है
जागा जागा रहता है
डूबा डूबा रहता है , तेरी याद में |
प्रिय बरस रहा है पानी
रुत हुई मस्तानी
तडपती है जवानी, बरसात में |
आज फिजाएं महकी है ऐसी
सुगंध तेरे तन जैसी
हलचल मची कैसी, मेरे गात में |
देखता हूँ जिस और भी
जाऊ किसी छोर भी
तू ही चितचोर ही, हर राह में |
सुनो मन व्याकुल मेरा
सांझ हो या सवेरा
होंठों पे है नाम तेरा, हर बात में |
कुछ खोया खोया रहता है
जागा जागा रहता है
डूबा डूबा रहता है , तेरी याद में |
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