मुझको अभी भी ना जाने किसकी आस है
ना जाने ये कैसी अजीब सी प्यास है |
आँखों के आगे कुछ काले बादलों के घेरें
मन को उथल पुथल करते वो शब्द मेरे
ह्रदय में अभी भी ना जाने कैसा क्यास है
ना जाने ये कैसी अजीब सी प्यास है |
कभी रूकती कभी चलती कभी छूट जाती
मेरे विरह को वो एक दर्द और दे जाती
जीवन को जीने की खोंज दिन रात है
ना जाने ये कैसी अजीब सी प्यास है |
ना जाने ये कैसी अजीब सी प्यास है |
wah......wah...wah....!!!!
ReplyDeleteधन्यवाद !
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