आओं चलें एक नयी दुनिया की खोज में
जहाँ बटती हो खुशियाँ हर पल हर रोज में |
जहाँ आँसू शब्द सुनाई ना दें
जहाँ डर के चाहरें दिखाई ना दें
जहाँ रोतें बच्चें सुनाई ना दें, भूखी माँ की कोंख में |
आओं चलें एक नयी दुनिया की खोज में ...
जहाँ स्वार्थ के लिए दंगें ना हो
जहाँ धर्म के नाम पर लोग नंगें ना हो
जहाँ हटते हाथ दिखाई ना दें, लाचारी के बोझ में |
आओं चलें एक नयी दुनिया की खोज में ...
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