खुदा से न मांगो वो, जो छोड़ जाते है साथ भी
फिर चाहे बनालो ताजमहल, कट जाते है हाथ भी |
फिर चाहे बनालो ताजमहल, कट जाते है हाथ भी |
वो मिट्टी है बे-ख़बर, इस झुलसते चमन से
फिर क्या कीमत होगी, मेरी कही दो बात की |
मेरी परछाई है, चंद उजालो की मोहताज
फिर क्या परवाह, दिन की या रात की |
वो बादल बन न पाया, एक छोटी सी ओंस भी
फिर क्या कीमत होगी, मेरे आंसू और जज्बात की ||
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