प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

04 August 2011

रुको !.....

मैं शांत सागर खुश था अपने खारे पानी में 
ना जाने क्यों किसी के नोका ने लहरें बना दी |

मैं प्रतीक्षा कर रहा था अपने छितिज अन्त की 
ना जाने क्यों किसी ने जल्द ही सज़ा दी |


मैं कहना चाहता था मत उतरो इस विशाल सागर में 
ना जाने क्यों किसी ने अपनी नोका ही गवां दी |


मैं नहीं जानता कोई और भी डूबेगा इधर आकार 
ना जाने क्यों मैंने अपनी लहरे ही भुला दी |

1 comment:

  1. sir jee i am very impress to read your poet.


    thanks
    arvind

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