प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

31 October 2015

ख़बर से ख़बर दब जाती !

ख़बर आती, ख़बर जाती
ख़बर से ख़बर दब जाती |

कुछ चिल्लाते, कुछ बतियाते
कुछ कहकर भी ना कह पाते
कुछ दिखाते, कुछ जताते
कुछ बुलाते, कुछ सुनाते
कुछ उड़ाते, कुछ खिस्याते 
कुछ ख़बर ही अलग बताते

दिखावे की चादर फट जाती
ख़बर से ख़बर दब जाती ||

कुछ रोते, कुछ बिलखते
कुछ जलते, कुछ सुलगते
कुछ काटते, कुछ कटते
कुछ उतरते, कुछ फटते
कुछ पीते, कुछ गटकते
कुछ निगलते, कुछ सटकते

आखों से शर्म मर जाती
ख़बर से ख़बर दब जाती ||

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