प्यारे दोस्तों !

यह ब्लॉग मेरे द्वारा रचित कविताओं का संग्रह है | आशा है आपको मेरी कलम से लिखी ये पंक्तियाँ पसंद आएँगी | आपके द्वारा किये गए कमेंट्स मेरे लिए विशेष होंगे |................धन्यवाद !

18 September 2011

वो जब कभी.....

वो जब कभी मेरे सामने 
आकर बैठ जाया करती थी 
बहुत चुराती थी नज़रे 
पर कमबख्त मिल जाया करती थी |

बालो को अपने बाँधने को 
वो देती रहती थी ऐठे 
पर कमबख्त वो ऐठे भी 
बार बार खुल जाया करती थी |

अपनी आँखों को छुपाने को 
वो लेती थी पलकों का सहारा 
पर कमबख्त वो पलके भी 
शरारत कर जाया करती थी |

अब जैसे मेरी आँखों को 
इसकी आदत सी हो गयी है 
पर कमबख्त अब वो आती नहीं 
ना जाने कहा खो गयी है |

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